01-03 September 2026 | Yashobhoomi (IICC), Dwarka, New Delhi

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हस्तशिल्प कारीगरों को एक मंच पर लाने की तैयारी, बिहार समेत देश भर के कारीगरों को होगा फायदा

भारत अपनी समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा के लिए जाना जाता है। हस्तशिल्प कारीगरों को एक मंच पर लाने की शुरुआत हुई है। ये सरकार और प्राइवेट सेक्टर का मिला-जुला प्रयास है। इसका मकसद कारीगरों को अच्छा बाजार, ट्रेनिंग और पैसे की मदद देना है। इससे जुड़े लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है।


 
देश की हस्तशिल्प विरासत को बाजार तक पहुंचाने की पहल शुरू हुई है। कारीगरों को एक साथ लाने के लिए 'आईएमएम इंडिया' का गठन किया गया है। ये सरकार और निजी क्षेत्र की एक पहल है। इसका लक्ष्य कारीगरों को बेहतर बाजार, ट्रेनिंग और आर्थिक मदद देना है। इनोवेशन, सहयोग और उद्योग के विकास को बढ़ावा देगा। ये बिहार समेत भारत के इंटीरियर और फर्नीचर बाजार को विश्व स्तर पर जोड़ेगा। इसे इंडिया हेबिटेट सेंटर में इसे लॉन्च किया गया।

समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा
बिहार के कुछ प्रसिद्ध हस्तशिल्प हैं, जैसे- मधुबनी पेंटिंग, सिक्की घास के उत्पाद, सुजनी कढ़ाई, भागलपुरी रेशम और नालंदा पत्थर शिल्प। पारंपरिक शिल्प बिहार की सांस्कृतिक विविधता और कलात्मक विरासत को प्रदर्शित करते हैं। मधुबनी पेंटिंग की शुरुआत बिहार के मिथिला क्षेत्र में हुई। इसमें प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल कर जटिल रेखाचित्र और आकृतियां बनाई जाती हैं। आमतौर पर इनमें अक्सर धार्मिक और पौराणिक विषयों को दिखाया जाता है। सिक्की घास से बनी वस्तुएं पर्यावरण के अनुकूल होती हैं। सुजनी कढ़ाई, रजाई बनाने की कला है, जिसमें पुराने कपड़ों का उपयोग किया जाता है। बिहार के भागलपुर रेशम उत्पादन का एक प्रमुख केंद्र है और यहां का रेशम अपनी चमक और बनावट के लिए फेमस है। नालंदा में पत्थर पर नक्काशी किया जाता है, जो इस क्षेत्र की एक प्राचीन कला है। लकड़ी पर नक्काशी, मिट्टी के बर्तन, बांस के काम और धातु के काम भी काफी पॉपुलर है।
 
हस्तशिल्प को बाजार तक पहुंचाने की कवायद
भारत का इंटीरियर डिजाइन बाजार 2024 में 36।4 बिलियन डॉलर का था। यह 14।3% की दर से बढ़कर 2032 तक 67।4 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा। मिलिंद दीक्षित के अनुसार, ये प्रदर्शनी ही नहीं बल्कि एक आंदोलन है। इसका उद्देश्य भारतीय प्रतिभा को एक मंच पर लाना है। अनुमान है कि 2033 तक यह बाजार दोगुना होकर 71 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा। 11 से 14 मार्च 2026 को दिल्ली में एक अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी होगी। ये भारतीय इंटीरियर और फर्नीचर उद्योग को बढ़ावा देगी। भारतीय ओद्यौगिक संगठनों जैसे- जोधपुर हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन, ईस्टर्न यूपी एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन, द हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन-मुरादाबाद एंड बगरू इंडस्ट्रियल एसोसिएशन समर्थित संगठन देश के तेजी से विकसित होते इंटीरियर और फर्नीचर मार्केट को विश्वस्तरीय इनोवेशंस के साथ जोड़ेगा।
 
करीगरों को मिलेगा ग्लोबल बाजार
भारत में डिजाइन की मांग बढ़ रही है। कोलनमेस्से ग्लोबल की मदद से यह मंच इंटीरियर के भविष्य को बदलेगा। यह आर्किटेक्ट, डिजाइनर और रीटेलरों को जोड़ेगा। यह कार्यक्रम भारतीय इंटीरियर कारोबार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह उद्योग को एक विश्वस्तरीय मंच देगा। इससे कारीगरों को उनके मेहतन का उचित पैसा दिलाने में मदद करेगा।

Press Coverage By: Navbharattimes.indiatimes.com 

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