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ग्लोबल मार्केट में भारतीय हैंडीक्राफ्ट का बजा डंका, 20-22% बढ़ेगा निर्यात; यशोभूमि में IMM इंडिया 2026 शु
नई दिल्ली में 'आईएमएम इंडिया 2026' प्रदर्शनी का शुभारंभ हुआ, जिसका उद्देश्य भारत को डिजाइन आधारित मैन्युफैक्चरिंग हब और वैश्विक सोर्सिंग प्लेटफॉर्म के रूप में स्थापित करना है।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। अनुकूल नीतियों, बेहतर बुनियादी ढांचे और वैश्विक व्यापार समझौतों के चलते भारत के फर्नीचर और हैंडीक्राफ्ट निर्यात में अगले तीन वर्षों के दौरान 20 से 22 प्रतिशत तक की सालाना वृद्धि की संभावना है।
उद्योग जगत के दिग्गजों का कहना है कि इस क्षेत्र को सब्सिडी से ज्यादा उत्पादन और निर्यात प्रक्रियाओं में सुगमता, बेहतर लॉजिस्टिक्स तथा प्रमुख वैश्विक बाजारों में भारतीय वेयरहाउस और शोरूम जैसी सुविधाओं की जरूरत है।
भारतीय इंटीरियर्स और फर्नीचर उद्योग को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने के उद्देश्य से तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी 'आईएमएम इंडिया 2026' का मंगलवार को नई दिल्ली स्थित यशोभूमि, द्वारका में शुभारंभ हुआ।
कोएलनमेस्से द्वारा 1 से 3 सितंबर तक आयोजित इस प्रदर्शनी में 102 प्रदर्शक और 8,000 से ज्यादा ट्रेड बायर्स हिस्सा ले रहे हैं। आयोजन का उद्देश्य भारत को डिजाइन आधारित मैन्युफैक्चरिंग हब और वैश्विक सोर्सिंग प्लेटफॉर्म के रूप में स्थापित करना है। उद्योग के मुताबिक, भारतीय होम फर्नीचर बाजार के 2031 तक 40.53 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
व्यापार समझौतों से निर्यात को मिलने की उम्मीद
हैंडलूम हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष सी.पी. शर्मा ने कहा कि उनके प्रत्यक्ष और सहयोगी संगठन करीब 5,600 निर्यातकों तथा 2,000 घरेलू उद्योगों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत के हस्तशिल्प और फर्नीचर क्षेत्र में निर्यात की अपार संभावनाएं हैं। सरकार के मजबूत निर्यात फोकस और ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, वियतनाम तथा यूरोपीय और अफ्रीकी देशों के साथ हुए व्यापार समझौतों से आने वाले वर्षों में निर्यात को गति मिलने की उम्मीद है।
2031 तक 40.53 अरब डॉलर का होगा बाजार
कोएलनमेस्से के प्रबंध निदेशक मिलिंद दीक्षित ने कहा कि आईएमएम इंडिया की शुरुआत भारत को वैश्विक फर्नीचर और इंटीरियर्स इकोसिस्टम में मजबूत पहचान दिलाने की दिशा में दीर्घकालिक कदम है। उन्होंने कहा कि भारतीय होम फर्नीचर बाजार के 2031 तक 8 प्रतिशत से अधिक की वार्षिक चक्रवृद्धि दर से बढ़ने की संभावना है।
कौशल विकास और ई-कॉमर्स से बढ़ रहे अवसर
वहीं, जोधपुर हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. भरत दिनेश ने कहा कि राजस्थान में हस्तशिल्प क्षेत्र कृषि के बाद सबसे अधिक रोजगार देने वाले क्षेत्रों में शामिल है। केवल राजस्थान से सालाना 12 हजार करोड़ का निर्यात होता है।
डॉ. दिनेश ने कहा कि वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए कारीगरों के कौशल विकास पर निवेश करना बेहद जरूरी है। दिल्ली के कीर्ति नगर टिम्बर एंड फर्नीचर डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश गुप्ता ने कहा कि भारतीय पारंपरिक और हस्तशिल्प फर्नीचर की गुणवत्ता वैश्विक स्तर पर मजबूत है।
ई-कॉमर्स और संगठित रिटेल के विस्तार ने कारोबार के लिए नए अवसर पैदा किए हैं, लेकिन पारंपरिक डीलरों के सामने बदलते बाजार के अनुरूप खुद को ढालने की चुनौती भी है।
Press Coverage By: jagran
